12 अक्टूबर 2020

भडोरा बोराई नदी पुल पर लगे रोड किनारे मंदिर बनाकर,बेजाकब्जा सड़क मार्ग को अवरुद्ध किये जा रहे हैं।


 वार्ड क्रमांक 5 के पंच के द्वारा नदी पर बने पुल से लगी सड़क पर मंदिर का निर्माण किये गए हैं,मार्ग में बाधा उत्पन्न तय है,दो बड़े वाहन ट्रक एक साथ  निकल नही सकता।


मालखरौदा जनपद पंचायत के अंतर्गत ग्राम पंचायत भडोरा के बोराई नदी पुल मेन रोड में मंदिर बना दिया गया है इस मंदिर बनने के कारण रोड की चौड़ाई कम हो गया है, जिससे कभी भी हादसे होने की संभावना है,आपको बता दे कुछ सालों पहले रीवाडीह भडोरा बोराई नदी मे यह पुल बना हुआ है  जो भडोरा जाने वाले पुल सड़क में कुछ साल पहले रोड किनारे में किसी ब्यक्ति द्वारा एक गोलाई आकार के पत्थर को बरसात में डाल दिया गया था और जब वह पानी की बारिस से मिटटी बह कर चला गया, जिससे वह गोलाई आकार का पत्थर निकलकर दिखने लगा जो शिव लिंग की तरह दिख रहा था तो गांव भडोरा के कुछ ब्यक्तियों ने इसे इस पत्थर को भगवान स्वरूप मानकर उसकी पूजा अर्चना करने लगे और उसके बाद वहां मंदिर बना दिया गया हैं । ग्रामीण बेजा कब्जा करने की नीयत से अब इसके चारों ओर  घेरकर बड़ा मंदिर बनाने की फ़िराक में है ताकि इसे लोगो की आस्था का केन्द्र बना कर कमाई कर सके जबकि नियमतःमुख्य सड़क पर मंदिर नही बनाया जा सकता है क्योंकि इससे बढ़ती आबादी और विकास के साथ सड़क पर भीड़ और गाड़ियों के आवागमन भी बढ़ेगा जिससे आवागमन मे बाधा उत्पन्न होगी जिससे भविष्य में दुर्घटना होने की प्रबल संभावना से इंकार नही किया जा सकता है और चूंकि यहाँ पुल है दुर्घटना की संभावना का प्रतिशत और भी बढ़ जाता है आश्चर्य है इस मंदिर पर आज तक लोक निर्माण विभाग के अधिकारियो की नजर नही पड़ी है । यहाँ के ग्रामीणों ने शासकीय भूमि पर कब्जा जमाने की नीयत से यह सब किया है और उनका इरादा भविष्य मे घर और दुकान बनाने का है।  यह सभी जानते हैं कि  भारत में  धर्म और मंदिर  बहुत संवेदनशील मुद्दा है क्योंकि शासन भी  मंदिर जैसे मुद्दों पर  ज्यादा ध्यान नहीं देती है  इसलिए यहां के ग्रामीणों ने  मंदिर के नाम पर  भूमि हथियाना शुरू किया है  जिससे  राजस्व विभाग का ध्यान यहां आ जाए  और भविष्य में यहां  बड़ा निर्माण कार्य कर सकें  जबकि दूसरी ओर  पहले एक मंदिर का निर्माण हो चुका है  जहां पर काफी संख्या में श्रद्धालु आते हैं तो फिर इसी जगह पर एक और मंदिर का निर्माण करना कहां तक उचित है  शासन इस तरह के  मंदिरों के नाम पर निर्माण पर अगर रोक नहीं लगाती है तो  भविष्य में  मंदिर होने की वजह से भीड़ बढ़ेगी और भीड़ के कारण दुर्घटना की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता  अगर यह मंदिर  भविष्य में बड़ा रूप लेती है  तो शासन को इसे हटाने में  कितनी परेशानी हो सकती है  इसे सहज ही समझा जा सकता है इस मंदिर के कारण  सड़क की चौड़ाई  भी कम हो रही है  जिससे  दो बड़े  ट्रक का आना जाना  यहां मुश्किल हो रहा है।


       ↪️अनुराग भट्ट ↩️

तहसीलदार मालखरौदा 

शासकीय रोड पुल किनारे पर बेजाकब्जा करके मंदिर बनाना मेरे जानकारी में नही है,पटवारी से इस बारे में जानकारी लेकर उस ऊपर उचित कार्यवाही किया जायेगा।

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