सड़क किनारे ईट-भट्टे का व्यपार राहगिरों को दे रहा है दुर्घटना का नेवता।
सक्ति/जैजैपुर:-जिले में इन दिनों अवैध ईंट भट्टा का कारोबार जोरों पर चल रहा है।जैजैपुर विकास खण्ड अंतर्गत सेंदरी से घिवरा मुख्य मार्ग किनारे संचालित अवैध ईट निर्माण का कार्य अनचाहे दुर्घटना को नेवता दे रही है, बड़ी संख्या में ईंट के भट्टों को बेख़ौफ़ लगाए गए हैं। यहां न कोई जानकारी लेने वाला है न पूछने वाला है। ईंट भट्टे के मालिक अपने तरीके से कार्य कर सड़क के किनारे ही ईट पकाने कार्य कर रहे हैं जिससे राहगिरों को कभी अनचाही घटनाओं का शिकार होना पड़ सकता है रोड़ किनारे अवैध ईंट भट्टों को लगाया गया है जिसको लेकर आवागमन करने वालों के मानों में भय बना हुआ है की कही किसी प्रकार की दुर्घटना घटित न हो जाये।
ताज्जुब की बात ये है खनिज अधिकारी को इस बात की भनक तक नही है न खनिज विभाग अवैध रूप ईट बनाने और भारी मात्रा में नियमों को तक मे रखकर बेख़ौफ़ ईंटों का संचालन करने वालों के ऊपर व उनके कारोबार को रोकने के लिए किसी प्रकार की कोई मुहिम नहीं चलाई जा रही है।
न लीज न ही मंजूरी फिर भी अवैध ईट भट्टे का काम जोरों पर है
विशेष सूत्रों से जानकारी के अनुसार क्षेत्र में संचालित कई ईंट भट्टे ऐसे हैं जिनके पास न प्रशासन की अनुमति न ही खनिज विभाग से लीज ली गई है। यहां तक की पंचायत की अनुमित भी लेना जरूरी नहीं समझा गया। अवैध रूप से चल रहे रोड़ किनारे पर इन ईंट भट्टो को आसानी से देखे जा की आखिर किस प्रकार निययों को ताक पर रख कैसे ईट बनाया जा रहा है। जिनकी जानकारी श्रम विभाग के अधिकारियों को भी है लेकिन धृतराष्ट्र की भूमिका निभा रहे है।
पर्यावरण प्रदूषण का खतरा प्रशासन मौन
क्षेत्र में चल रहे इन ईंट भट्टों से अब पर्यावरण को भी नुकसान हो रहा है। रहवासी क्षेत्र के पास लगे होने से दिन भर धुंआ फैलता रहता है। कोयला का उपयोग न कर लकड़ी, भूसी, प्लास्टिक सामग्री का भी इस्तेमाल उपयोग में किया जा रहा है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
भट्ठे लगाने के नियमों को माने तो:-
अगर किसी व्यक्ति को ईंट भट्टे का व्यापार करना है तो उसे मिट्टी उत्खनन के लिए लीज की स्वीकृति लेने के लिए पर्यावरण विभाग की एनओसी, वन विभाग की एनओसी, ग्राम पंचायत की मंजूरी, तहसील की एनओसी, निर्माण करने वाले लोगों का लायसेंस आदि तैयार कराना होता है। तब ही कोई कही ईंट भट्टों का व्यापार कर सकते हैं। खनिज अधिकारी जांजगीर ने बताया कि खनिज विभाग के माध्यम से सेंदरी में एक भी ईंट भट्टा का लाइसेंस नहीं दिया गया है। हमारे यहां से केवल सामान्य वर्ग के लोगों को ईंट भट्टे का लायसेंस दिया जाता है। अनुसूचित जाति एवं कुम्हारों को तहसीलदार के यहां से अनुमति लेनी पड़ती है।


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