आकाशवाणी से प्रसारित कार्यक्रमों के प्रति रेडियो श्रोताओं की दिलचस्पी आज भी बरकरार।
सक्ती जिले से रेडियो श्रोता पहुंचे आकाशवाणी केन्द्र रायगढ़
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सक्ती/आकाशवाणी की स्थापना के बाद से लेकर अब तक राष्ट्र निर्माण में आकाशवाणी से प्रसारित होने वाले कार्यक्रमों की भूमिका अति महत्वपूर्ण रही है। आज हम जबकि तकनीकी रूप से बहुत समृद्ध हुए हैं। हमारे पास जनसंचार के बहुत सारे माध्यम उपलब्ध हैं ऐसे समय में आज भी आकाशवाणी से प्रसारित होने वाले कार्यक्रमों को सुनने के लिए रेडियो श्रोताओं में दिलचस्पी बरकरार है। आज भी हमारे श्रोता हमें पत्र लिखते हैं जो उनका हमारे कार्यक्रमों के प्रति असीम स्नेह को प्रदर्शित करता है। कहना ग़लत न होगा कि आज भी रेडियो देश के लोगों में एक बड़े वर्ग के बीच जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। उक्त बातें आकाशवाणी केन्द्र रायगढ़ के कार्यक्रम अधिशासी शशि प्रकाश पाण्डेय ने आकाशवाणी केन्द्र पहुंचे रेडियो श्रोताओं से कहीं। विदित हो कि बीते दिनों सक्ती जिले से रेडियो के विशेष श्रोता आकाशवाणी केन्द्र रायगढ़ पहुंचे हुए थे। इनमें सक्ती जिला अंतर्गत ग्राम डोंड़की निवासी सामाजिक कार्यकर्ता व हिंदी दैनिक अमृत संदेश सक्ती जिला संवाददाता योम प्रकाश लहरे तथा मां अष्टभुजी की नगरी अड़भार निवासी व्याख्याता केंवरा सिंह के साथ रेडियो के गुणी श्रोता शामिल रहे।
आज के दौर में भी रेडियो जन-जन से जुड़ा हुआ है- योम प्रकाश लहरे
इस अवसर पर पत्रकार योम प्रकाश लहरे ने कहा कि आज भी देश में एक बहुत बड़ा तबका सूचना, शिक्षा, स्वास्थ्य व मनोरंजन के लिए रेडियो को अपना माध्यम बनाए हुए है। इसके मद्देनजर लोग आकाशवाणी से प्रसारित होने वाले कार्यक्रमों को सुनने के लिए रेडियो सुनना विशेष रूप से पसंद करते हैं। पत्रकार योम प्रकाश ने कहा हमें अपने हक अधिकारों के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ जीवन के विविध क्षेत्रों में घटित हो रही घटनाक्रमों की जानकारी सम्प्रेषण तथा राष्ट्र समाज व व्यक्तियों की आवश्यकताओं आशाओं एवं आकांक्षाओं को पूरा करने में महती भूमिका निभा रहा है ।
कोरोनाकाल में जब जिंदगी थम सी गई थी तब तब रेडियो लोगों के बीच मेल बनाए हुए था- केंवरा सिंह
आकाशवाणी केन्द्र पहुंचे व्याख्याता केंवरा सिंह ने कहा वैश्विक महामारी कोरोना काल में जब जिंदगी की रफ्तार एक तरह से थम सी गई थी। लोग घरों में कैद होकर रह गए थे। एक दूसरे से मेल मिलाप बंद हो गया था ऐसे बेहद कठिन समय में रेडियो ही था जो आकाशवाणी से प्रसारित होने वाले विविध कार्यक्रमों के जरिए मेल बनाए हुए था। अपने जागरूकता कार्यक्रमों के साथ-साथ अपने मधुर गीत-संगीत भरे कार्यक्रमों के जरिए लोगों में जीवन के प्रति उत्साह व सकरात्मकता बनाए रखा। गीत संगीत खासकर गुजरे जमाने के फिल्म संगीत पर विशेष जानकारी रखने वाली केंवरा सिंह ने बताया कि कोरोनाकाल में लोगों को लाकडाउन के मुश्किल दौर में म्यूजिक थैरेपी के जरिए उनमें जीवन के प्रति उत्साह तथा उनमें सकरात्मकता बनाए रखने में रेडियो ने अह्म भूमिका निभाई थी। बहुजन हिताय व बहुजन सुखाय के अपने ध्येय वाक्य की पूर्ति के लिए अपनी स्थापना के बाद से आज पर्यन्त के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। जिसका सीधा लाभ समाज में लोगों को मिल रहा है। इसके अलावा खेती किसानी भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती है। कृषि उत्पादन में कमी, ग्रामों का विकास, पर्यावरण संरक्षण, खेलकूद को बढ़ावा देने के साथ साथ कला व संस्कृति तथा स्थानीय विधाओं को उभारने तथा इसे समृद्ध बनाने में भी आकाशवाणी की भूमिका अति महत्वपूर्ण रही है। आज भी इस आधुनिकता के दौर में बदली हुई परिस्थितियों के बावजूद भी आकाशवाणी से प्रसारित कार्यक्रमों के प्रति लोगों की दीवानगी बरकरार है।



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