03 जून 2021

मानसिक संतुलन खो चुके है बाबा रामदेव आयुर्वेद से पहचान मिली अब वेद परव् सवाल उठा रहे है - राघवेन्द्र पाण्डेय


 मानसिक संतुलन खो चुके है बाबा रामदेव आयुर्वेद से पहचान मिली अब वेद परव्  उठा रहे है - राघवेन्द्र पाण्डेय

जांजगीर चाम्पा -  प्रतिष्ठित समाजसेवी पं राघवेन्द्र पाण्डेय ने कहा कि पंतजलि योगपीठ के संस्थापक बाबा रामदेव जिस थाली में खा रहे है उसी में छेद कर रहे है । श्री पाण्डेय ने कहा कि योग और आयुर्वेद से रामदेव को पहचान मिली है अब वे वेद के छठे अंग ज्योतिष पर सवाल उठा रहे है श्री पाण्डेय ने कहा कि ज्योतिष को वेद का छठा अंग और नेत्र बताया गया है उन्होंने कहा कि रामदेव ये समझ नही रहे है कि वे ज्योतिष पर नही वेद पर सवाल उठा रहे है । उन्होंने तंज कसा और बिना नाम लिये कहा कि उनका एक नेत्र ही नही नजरिया भी खराब है वे स्वयं योग से ना अपने नेत्र को ठीक कर पा रहे है और ना ही अपने जबान में नियंत्रण रख पा रहे है । श्री पाण्डेय ने कहा कि हालांकि हम समझते है कि विज्ञान और योग की अपनी-अपनी सीमाऐं है इसलिये कोविड 19 या किसी भी बिमारी से बचाव के लिये हमें आयुर्वेद और ऐलोपैथी दोनों पर भरोसा रखना चाहिए परंतु योग और आयुर्वेद के व्यापारी में भी यह समझने की क्षमता हो इसकी अपेक्षा नही की जा सकती है । श्री पाण्डेय ने आगे कहा कि रामदेव के संकीर्ण विचारों और वाचालता से उन्हें संत की श्रेणी में नही गिना जा सकता है वे एक सफल व्यापारी है लेकिन संत नही है । अपने अहंकार और मानसिक दिवालियापन के कारण रामदेव ऐलोपैथी के बाद अब वेद पर भी सवाल उठा रहे है । श्री पाण्डेय ने कहाकि बाबा रामदेव को मानसिक संतुलन प्रदान करने हेतु मै आयुर्वेद के देवता धन्वंतरी से प्रार्थना करता हुं ।


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