01 मई 2020



*सत्ता का नशा जब सर पर चढ़ता है तो जनप्रतिनिधि अपने आप को ही सरकार समझने लगता है, ऐसा ही मामला ग्राम पंचायत भातमाहुल सरपंच का हाल है*               *                                   *जैजैपुर जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत भातमाहुल के सरपंच अपने पद का दुरूपयोग करते आ रहा है सरपंच के द्वारा मनरेगा का कार्य के तहत तालाब गहरीकरण के कार्य कराने में दो दर्जन से अधिक की संख्या में तालाब पार के हरेभरे कई अर्जुन औषधि वृक्ष सहित अन्य पेडों को कटवा दिया गया है,जिसके चलते हरेभरे पेड़ो की छाया में रहने वाला ग्राम भातमाहुल के पुराना चुना पैठु तालाब पार सरपंच की मनमानी का भेट चढ़ गया है इनके अहंकार प्रवित्ति के कारण पैठु तालाब पार के  वृक्ष आज वीरान पड़ा है, यहाँ के सरपंच को सत्ता और सरकार की ऊँची पहुँच के कारण इतना घमंड हो गया है कि वह अपने ही ग्राम पंचायत के वृक्षो को काट कर तहस नहस करके बर्बाद कर दिया गया है, इस औषधि वृक्षो की कटाई करवाने वाले सरपंच के गलत कार्य को ग्रामीण व् कुछ पंचो ने आला अधिकारियों को सूचित कर जानकारी दी तो जैजैपुर जनपद के तहसीलदार पटवारी निरीक्षण करने ग्राम पंचायत भातमाहुल पहुँचे तो सरपंच और उसके छोटे पुत्र के द्वारा अधिकारियों से बहस बाजी करते नजर आए यह मीडिया कर्मियों के समक्ष हुआ और  सरपंच ने अधिकारियो को अपने हिसाब से निरीक्षण प्रतिवेदन बनाने की दबाव बनाने का प्रयास किया जा रहा था, मगर उक्त अधिकारियों ने मौहोल को भांपते हुए विवाद की स्थिति न आये यह सोचकर अपने हिसाब से प्रतिवेदन बनाकर आगे की कार्यवाही के लिए दिशा निर्देश दिया, अब देखना यह होगा की ग्राम पंचायत भातमाहुल के इस हरेभरे वृक्षो को और ग्रामीणों को न्याय मिलता है कि नही, यहाँ पर यह बता देना उचित होगा कि भातमाहुल सरपंच भगवानदास चन्द्रा का ऊंची पहुँच है उनके बड़े बेटे विजय चन्द्रा का छग कांग्रेस सरकार के जानेमाने नेता है इसी वजह से यहाँ के सरपंच को किसी अधिकारी कर्मचारी पुलिस प्रशासन से कोई भय नहीं है इसी वजह से अपनी धौस जमाते है ऐसे सरपंच अपनी पहुँच का गतल फायदा उठाने में कोई कसर नहीं छोड़ते ।



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